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ધરતીના દેહ પરે ચડિયા છે પુંજ પુંજ
સડિયેલાં ચીર, ધૂળ, કૂંથો;

Upon the earth's body, piled high in heaps upon heaps, Are rotten rags, dust, and refuse;

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

धरती के शरीर पर ढेर के ढेर सड़े हुए चिथड़े, धूल और कूड़ा जमा हो गया है।

विस्तार

यह दोहा हमारी धरती की एक गहरी और कुछ हद तक उदास तस्वीर पेश करता है। इसमें बताया गया है कि "धरती के शरीर पर" "ढेरों-ढेर" सड़ी हुई चीज़ें जैसे "फटे-पुराने कपड़े," "धूल," और "कूड़ा-कचरा" जमा हो गए हैं। कल्पना कीजिए कि कैसे उपेक्षित कचरा और मलबा परत-दर-परत इकट्ठा हो गया है। यह एक शक्तिशाली रूपक है, जो दर्शाता है कि कैसे मानवीय कार्य या लापरवाही, हमारे ग्रह पर क्षय और गंदगी के ढेर लगा देती है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि धरती किस तरह हमारे छोड़े हुए सामान के बोझ तले दबी हुई है, जो प्रदूषण और पर्यावरणीय गिरावट का एक स्पष्ट चित्रण प्रस्तुत करता है।

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