“Disgraced and ill-reputed are you: yet a mother is a mother!Helpless, defeated, stumbling are you: yet a mother is a mother!”
भले ही तुम अपमानित और बदनाम हो, या बेबस, पराजित और लड़खड़ाती हो, फिर भी माँ तो माँ ही रहती है।
यह दोहा माँ के निस्वार्थ और अटूट पहचान को खूबसूरती से दर्शाता है। यह कहता है, 'यदि तुम अपमानित या बदनाम भी हो, तब भी तुम माँ हो; माँ तो माँ ही रहती है।' और आगे, 'यदि तुम परवश, पराजित और लड़खड़ाती हुई भी हो, तब भी तुम माँ हो; माँ तो माँ ही रहती है।' यह पंक्तियाँ इस बात पर जोर देती हैं कि माँ का सच्चा स्वरूप और भूमिका किसी भी बाहरी निर्णय, असफलता या कठिनाइयों से परे है। दुनिया की धारणाओं या खुद की मुश्किलों से अप्रभावित, उसका अनूठा स्थान और प्यार हमेशा स्थिर रहता है। यह मातृत्व की अविचल भावना को एक हार्दिक श्रद्धांजलि है।
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