તુજ ખોળલા ભરિયલ હતા,
ત્યાં લગી મીઠા લાગતા!
“As long as your lap was full,All things then seemed sweet.”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
जब तक तुम्हारी गोद भरी हुई थी, तब तक सब कुछ मीठा लगता था।
विस्तार
यह दोहा बताता है कि जब तक किसी की 'झोली भरी' रहती है, तब तक सब कुछ मीठा और सुखद लगता है। यह खूबसूरती से समझाता है कि हमारी खुशी और दुनिया को देखने का तरीका अक्सर हमारी परिस्थितियों से जुड़ा होता है। जब हमारे पास प्रचुरता, आराम, या किसी का प्यार भरा साथ होता है, तो जीवन मधुर लगता है। लेकिन, जैसे ही यह 'भरपूरता' – चाहे वह धन हो, भावनात्मक सहारा हो, या सुरक्षा का अहसास – कम होने लगती है, वही चीजें जो कभी खुशी देती थीं, अपना आकर्षण खो सकती हैं। यह एक मार्मिक विचार है कि कैसे बाहरी कारक हमारी आंतरिक संतुष्टि को प्रभावित करते हैं।
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