ग़ज़ल

काम आख़िर जज़्बा-ए-बे-इख़्तियार आ ही गया

کام آخر جذبۂ بے اختیار آ ہی گیا
जिगर मुरादाबादी· Ghazal· 9 shers· radif: आ ही गया

यह ग़ज़ल प्रेम के अदम्य जज़्बे और विरह की तड़प की जीत को दर्शाती है, जो आख़िरकार महबूब के दिल को पिघला ही देती है। इसमें इंतज़ार के चरम बिंदु और प्रियतम के आगमन से उपजे मिलन के परम आनंद को खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
काम आख़िर जज़्बा-ए-बे-इख़्तियार आ ही गया दिल कुछ इस सूरत से तड़पा उन को प्यार आ ही गया
आखिरकार बेबस और बेकाबू जज़्बा काम आ ही गया, दिल कुछ इस तरह तड़पा कि महबूब को भी प्यार आ ही गया।
2
जब निगाहें उठ गईं अल्लाह-री मेराज-शौक़ देखता क्या हूँ वो जान-ए-इंतिज़ार आ ही गया
जैसे ही मेरी निगाहें उठीं, शौक़ की इंतहा तो देखिए कि सामने क्या देखता हूँ, जिसका मुझे बेसब्री से इंतज़ार था वह आख़िरकार आ ही गया।
3
हाए ये हुस्न-ए-तसव्वुर का फ़रेब-ए-रंग-ओ-बू मैं ये समझा जैसे वो जान-ए-बहार आ ही गया
कल्पना की सुंदरता का यह रंग और सुगंध का भ्रम ऐसा था कि मुझे लगा जैसे बहार की जान (मेरा महबूब) सचमुच आ ही गया है।
4
हाँ सज़ा दे ऐ ख़ुदा-ए-इश्क़ ऐ तौफ़ीक़-ए-ग़म फिर ज़बान-ए-बे-अदब पर ज़िक्र यार आ ही गया
हाँ, ऐ इश्क़ के ख़ुदा और ग़म की तौफ़ीक़, मुझे सज़ा दे, क्योंकि इस गुस्ताख़ ज़बान पर एक बार फिर महबूब का ज़िक्र आ ही गया।
5
इस तरह ख़ुश हूँ किसी के वादा-ए-फ़र्दा पे मैं दर-हक़ीक़त जैसे मुझ को ए'तिबार आ ही गया
मैं किसी के कल के वादे पर इस तरह ख़ुश हूँ, मानो सचमुच मुझे उस पर भरोसा हो गया हो।
6
हाए काफ़िर-दिल की ये काफ़िर जुनूँ-अंगेज़ियाँ तुम को प्यार आए न आए मुझ को प्यार आ ही गया
हाय, इस बेदर्द दिल का यह पागलपन पैदा करने वाला जुनून! तुम्हें मुझ पर प्यार आए या न आए, लेकिन मुझे तो तुमसे प्यार हो ही गया।
7
दर्द ने करवट ही बदली थी कि दिल की आड़ से दफ़अ'तन पर्दा उठा और पर्दा-दार आ ही गया
दर्द ने अभी करवट ही बदली थी कि अचानक दिल की आड़ से पर्दा उठ गया और पर्दे के पीछे छुपा महबूब सामने आ गया।
8
दिल ने इक नाला किया आज इस तरह दीवाना-वार बाल बिखराए कोई मस्ताना-वार आ ही गया
आज दिल ने पागलों की तरह ऐसी फ़रियाद की कि कोई अपने बाल बिखेरे मस्तों के अंदाज़ में खिंचा चला आया।
9
जान ही दे दी 'जिगर' ने आज पा-ए-यार पर उम्र भर की बे-क़रारी को क़रार आ ही गया
आज 'जिगर' ने अपने महबूब के कदमों में अपनी जान दे दी, और इस तरह जीवन भर की बेचैनी को आखिरकार सुकून मिल ही गया।
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