ग़ज़ल

कोई ये कह दे गुलशन गुलशन

کوئی یہ کہہ دے گلشن گلشن

यह ग़ज़ल जीवन और प्रेम की नाज़ुक स्थिति तथा निरंतर आने वाली विपदाओं का मार्मिक चित्रण करती है। इसमें राहबर और रहज़न दोनों के फरेब को उजागर करते हुए मानवीय दिल को ही मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र और सबसे बड़ा शत्रु बताया गया है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
कोई ये कह दे गुलशन गुलशन लाख बलाएँ एक नशेमन
कोई जाकर हर बाग़ में यह कह दे कि घोंसला तो बस एक ही है, लेकिन उस पर लाखों मुसीबतें और ख़तरे मँडरा रहे हैं।
2
क़ातिल रहबर क़ातिल रहज़न दिल सा दोस्त न दिल सा दुश्मन
दिल ही जानलेवा रहनुमा है और दिल ही जानलेवा लुटेरा भी; दिल जैसा न तो कोई दोस्त है और न ही दिल जैसा कोई दुश्मन।
3
फूल खिले हैं गुलशन गुलशन लेकिन अपना अपना दामन
हर बाग़ में फूल खिले हुए हैं, लेकिन हर इंसान के पास समेटने के लिए सिर्फ़ अपना ही दामन है।
4
इश्क़ है प्यारे खेल नहीं है इश्क़ है कार-ए-शीशा-ओ-आहन
प्यारे, इश्क़ कोई खेल नहीं है, बल्कि यह नाज़ुक शीशे और सख़्त लोहे के बीच का एक बेहद कठिन मुक़ाबला है।
5
ख़ैर मिज़ाज-ए-हुस्न की या-रब तेज़ बहुत है दिल की धड़कन
हे ईश्वर! महबूब की ख़ैरियत और मिज़ाज सलामत रहे, क्योंकि मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो गई है।
6
आ कि न जाने तुझ बिन कब से रूह है लाशा जिस्म है मदफ़न
चले आओ, क्योंकि न जाने कब से तुम्हारे बिना रूह एक लाश बन चुकी है और यह शरीर उसकी क़ब्र।
7
आज न जाने राज़ ये क्या है हिज्र की रात और इतनी रौशन
आज न जाने यह क्या रहस्य है कि जुदाई की रात होने के बावजूद इतनी रोशनी क्यों है।
8
उम्रें बीतीं सदियाँ गुज़रीं है वही अब तक इश्क़ का बचपन
कई उम्रें बीत गईं और सदियाँ गुज़र गईं, लेकिन प्रेम अब भी अपने उसी बचपन के दौर में है।
9
तुझ सा हसीं और ख़ून-ए-मोहब्बत वहम है शायद सुर्ख़ी-ए-दामन
तुम जैसा ख़ूबसूरत इंसान और मोहब्बत का क़त्ल? तुम्हारे दामन पर नज़र आने वाली यह लाली शायद सिर्फ़ एक वहम है।
10
बर्क़-ए-हवादिस अल्लाह अल्लाह झूम रही है शाख़-ए-नशेमन
अल्लाह-अल्लाह, मुसीबतों की बिजली का आलम तो देखिए, और फिर भी घोंसले वाली डाली बेपरवाह होकर झूम रही है।
11
तू ने सुलझ कर गेसू-ए-जानाँ और बढ़ा दी शौक़ की उलझन
ऐ महबूब की ज़ुल्फ़ों, तुम्हारे सुलझ जाने से मेरे दिल की चाहत और बेचैनी की उलझन और भी बढ़ गई है।
12
रहमत होगी तालिब-ए-इस्याँ रश्क करेगी पाकीए-दामन
ईश्वर की रहमत गुनाहों को तलाशेगी और दामन की पाकीज़गी गुनाहगारों के दामन पर रश्क करेगी।
13
दिल कि मुजस्सम आईना-सामाँ और वो ज़ालिम आईना-दुश्मन
दिल पूरी तरह से आईने के समान नाज़ुक और साफ़ है, जबकि वह ज़ालिम महबूब आईनों का दुश्मन है जो उसे तोड़ने पर आमादा है।
14
बैठे हम हर बज़्म में लेकिन झाड़ के उट्ठे अपना दामन
हम हर महफ़िल और सभा में बैठे, लेकिन जब भी वहां से उठे तो अपना दामन झाड़ कर यानी पूरी तरह बेदाग़ और अलग रहकर उठे।
15
हस्ती-ए-शाएर अल्लाह अल्लाह हुस्न की मंज़िल इश्क़ का मस्कन
कवि का अस्तित्व क्या ही कमाल और अद्भुत है; वह सौंदर्य की मंज़िल और प्रेम का ठिकाना है।
16
रंगीं फ़ितरत सादा तबीअत फ़र्श-नशीं और अर्श-नशेमन
वह व्यक्ति जिसकी प्रकृति रंगीन और स्वभाव सादा है; जो ज़मीन पर बैठता है, मगर जिसका आशियाना आसमान पर है।
17
काम अधूरा और आज़ादी नाम बड़े और थोड़े दर्शन
काम अधूरा पड़ा है फिर भी आज़ादी की चाह है; नाम तो बहुत बड़ा है लेकिन हकीकत बहुत मामूली है।
18
शम्अ है लेकिन धुंदली धुंदली साया है लेकिन रौशन रौशन
शम्अ जल तो रही है लेकिन धुंधली है, जबकि परछाईं मौजूद है मगर वह बिल्कुल रोशन और चमकदार है।
19
काँटों का भी हक़ है कुछ आख़िर कौन छुड़ाए अपना दामन
आख़िरकार काँटों का भी कुछ हक़ बनता है, इसलिए भला कौन उनसे अपना दामन छुड़ाए।
20
चलती फिरती छाँव है प्यारे किस का सहरा कैसा गुलशन
हे प्यारे, यह सब तो एक चलती-फिरती छाँव की तरह अस्थायी है; यहाँ न किसी का कोई रेगिस्तान है और न ही किसी का कोई चमन।
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