माटी कहे कुम्हार से , तु क्या रौंदे मोय। एक दिन ऐसा आएगा , मैं रौंदूंगी तोय॥
“The clay says to the potter, 'Why do you trample me? One day will come when I will trample you.'”
— कबीर
अर्थ
माटी (मिट्टी) कुम्हार से कहती है कि, 'तुम मुझे क्यों रौंदते हो? एक दिन ऐसा आएगा जब मैं तुम्हें रौंदूंगी।'
विस्तार
अरे वाह, यह दोहा तो ज़िंदगी की एक बहुत प्यारी और गहरी बात कहता है! यहाँ मिट्टी कुम्हार से कह रही है कि आज भले ही तुम मुझे अपने पैरों तले रौंद रहे हो, पर ये मत भूलो कि एक दिन तुम भी इसी मिट्टी में मिल जाओगे और तब मैं ही तुम्हें अपने में समेट लूंगी। यह हमें याद दिलाता है कि दुनिया में कोई भी हमेशा के लिए ताकतवर नहीं रहता, और अंत में सबको उसी मिट्टी में लौटना है जहाँ से हम सब आए हैं।
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