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जो तोकु कांटा बुवे , ताहि बोय तू फूल। तोकू फूल के फूल है , बाकू है त्रिशूल॥ 21॥

If you pluck the thorny stem, plant a flower there. Though your flower is a flower, your pole is the trident.

कबीर
अर्थ

जो स्थान काँटा उगाता है, वहाँ फूल उगा दो। हालाँकि तुम्हारा फूल एक फूल है, तुम्हारा खंभा (या आधार) त्रिशूल है।

विस्तार

कबीर यहाँ एक बहुत गहरी बात समझा रहे हैं, जैसे अगर जड़ ही काँटों वाली हो तो उस पर फूल सजाने से उसका स्वभाव नहीं बदल जाता। उनका कहना है कि अगर किसी का मूल स्वभाव या अंदरूनी नीयत अच्छी नहीं है, तो सिर्फ बाहरी दिखावा या मीठी बातें कुछ काम नहीं आतीं। असली और टिकाऊ बदलाव तो तभी आता है जब हम अपने भीतर के 'त्रिशूल' यानी अपने मूल व्यवहार और सोच को सुधारते हैं।

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