आए हैं सो जाएँगे , राजा रंक फकीर। एक सिंहासन चढ़ि चले , एक बाँधि जंजीर॥ 144॥
“Those who have come shall depart, be they kings, beggars, or ascetics. One will ascend a throne, and one will be bound by chains.”
— कबीर
अर्थ
जो आए हैं वे चले जाएंगे, चाहे वे राजा हों, रंक हों या फकीर। एक सिंहासन पर बैठेगा, और एक जंजीरों से बंध जाएगा।
विस्तार
कबीर दास जी इस दोहे में जीवन की नश्वरता और मृत्यु की अटल सच्चाई को बड़े ही सहज ढंग से समझाते हैं। वे कहते हैं कि इस दुनिया में जो भी आया है, चाहे वह राजा हो, गरीब हो या फकीर, एक दिन उसे जाना ही है। सिंहासन पर बैठने वाला राजा हो या ज़ंजीरों में बँधा कोई कैदी, मौत सबको एक बराबर कर देती है, जहाँ सभी सांसारिक भेद मिट जाते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि दुनियावी चीज़ों से बहुत ज़्यादा मोह न रखें, क्योंकि अंत में सब कुछ अस्थायी है।
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