Sukhan AI
कबिरा आप ठगाइए , और न ठगिए कोय। आप ठगे सुख होत है , और ठगे दुख होय॥ 175॥

O Kabir, deceive us, but do not deceive anyone. Deceiving us brings happiness, and deceiving others brings sorrow.

कबीर
अर्थ

कबीरा, आप हमारा छल कीजिए, और किसी और को छल मत करना। आपको छल करने से सुख होता है, और दूसरों को छल करने से दुख होता है।

विस्तार

नमस्ते! कबीर दास जी यहाँ कितनी गहरी बात कह रहे हैं। वो कहते हैं कि अपने आप को 'ठगा' जाना स्वीकार कर लो, पर किसी और को धोखा मत दो। इसका मतलब है कि जब हम अपने अहंकार को छोड़कर किसी गुरु की बातों को या सच्चाई को विनम्रता से स्वीकार करते हैं, तो वो एक तरह से खुद को ठगाना ही है, पर इसमें हमें असली सुख मिलता है। लेकिन अगर हम दूसरों को छलते हैं, तो उसका नतीजा हमेशा दुख और पश्चाताप ही होता है, क्योंकि निस्वार्थता में ही सच्ची खुशी है।

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पाठ
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