केतन दिन ऐसे गए , अन रुचे का नेह। अवसर बोवे उपजे नहीं , जो नहिं बरसे मेह॥ 179॥
“Days pass thus, with an unrestrained affection. Opportunities do not arise for those whom no rain showers.”
— कबीर
अर्थ
केतन दिन ऐसे बीत गए, अनियंत्रित प्रेम के साथ। अवसर उन लोगों के लिए नहीं उगते जिन्हें बारिश नहीं होती।
विस्तार
कबीरदास जी इस दोहे में बताते हैं कि हमारे जीवन के दिन कई बार ऐसी इच्छाओं या मोह में बीत जाते हैं जो शायद हमें पूरी तरह से संतुष्ट नहीं करतीं। यह ठीक वैसे ही है जैसे बिना बारिश के खेत में बीज बोने पर भी फसल नहीं उगती; उसी तरह, अगर हमें सही अवसर या परिस्थितियों रूपी 'बारिश' न मिले, तो हमारे सारे प्रयास व्यर्थ जा सकते हैं। यह दोहा हमें याद दिलाता है कि केवल कोशिश करना ही नहीं, बल्कि अनुकूल समय और भाग्य का साथ मिलना भी उतना ही ज़रूरी है।
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