तीर तुपक से जो लड़े , सो तो शूर न होय। माया तजि भक्ति करे , सूर कहावै सोय॥ 202॥
“He who fights with arrows and darts is not a true warrior. He who abandons illusion and practices devotion, that is what the hero says.”
— कबीर
अर्थ
जो व्यक्ति केवल शस्त्रों से लड़ता है, वह सच्चा योद्धा नहीं होता। सच्चा योद्धा वह है जो माया का त्याग करके भक्ति करता है, जैसा कि शायर कहता है।
विस्तार
कबीर साहब यहाँ हमें सच्ची बहादुरी का मतलब समझा रहे हैं। वो कहते हैं कि तीर-तलवार से लड़ने वाला असल शूरवीर नहीं होता, बल्कि सच्चा योद्धा वो है जो इस संसार के मोह-माया के जाल को छोड़कर पूरी लगन से भक्ति के रास्ते पर चलता है। ये भीतर की लड़ाई लड़ना और ईश्वर को अपनाना ही सबसे बड़ी वीरता है।
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