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दस द्वारे का पींजरा , तामें पंछी मौन। रहे को अचरज भयौ , गये अचम्भा कौन॥ 206॥

A cage of ten doors, within it birds are silent. What wonder did the remaining ones feel, what surprise did the departed ones bring?

कबीर
अर्थ

दस द्वारे का पींजरा है, जिसमें पंछी शांत हैं। जो बचे हुए थे, वे आश्चर्यचकित हुए, और जो चले गए, वे किस आश्चर्य को लेकर गए।

विस्तार

कबीरदास जी यहां हमारे शरीर को एक 'दस द्वारे का पींजरा' बताते हैं, जिसमें हमारी आत्मा 'मौन पंछी' की तरह निवास करती है। ये दस द्वार हमारी इंद्रियों और मन के प्रतीक हैं, जो हमें संसार से जोड़े रखते हैं और अक्सर हमारी आत्मा की आवाज़ को शांत कर देते हैं। कवि हमसे पूछते हैं कि इस नश्वर काया में आत्मा के रहने पर क्यों अचम्भा हो, और इसके चले जाने पर भला क्या हैरानी? यह तो संसार का अटल नियम है, जहाँ आत्मा की मुक्ति ही परम सत्य है।

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