माया छाया एक सी , बिरला जाने कोय। भागत के पीछे लगे , सन्मुख भागे सोय॥ 223॥
“Maya and shadow appear alike, few know their truth. Chasing behind what is illusory, one runs toward what is real.”
— कबीर
अर्थ
माया और छाया एक जैसी लगती हैं, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं। जो व्यक्ति किसी भ्रम का पीछा करता है, वह वास्तव में सामने की सच्चाई की ओर भागता है।
विस्तार
कबीर दास जी कहते हैं कि माया और परछाई, दोनों एक जैसी दिखती हैं, इन्हें समझना बहुत मुश्किल है। बहुत कम लोग ही इनके सच्चे स्वरूप को पहचान पाते हैं, और अक्सर हम दुनियावी चीज़ों के भ्रम में पड़ जाते हैं। लेकिन इस दोहे का गहरा अर्थ यह है कि जब हम इन क्षणभंगुर चीज़ों के पीछे भागते हैं, तो अनजाने में ही सही, हम सच्चाई और यथार्थ की ओर बढ़ रहे होते हैं।
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