“Speak such words that lose the self of the mind; and cool the others, and the self will cool. Kabir: In the name of Hari, a love remains for the world, so pearls fall from the mouth, and diamonds never end.”
ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोइए। औरन को शीतल करै, आपहु शीतल होइए। कबीर, हरि के नाम से प्रेम रहता एक बार। तो मुख से मोती झड़ै हीरे अंत न पार।
कबीर दास जी यहाँ हमें वाणी की शक्ति समझा रहे हैं। वे कहते हैं कि हमें ऐसी मधुर और नम्र बातें बोलनी चाहिए जिससे हमारा अहंकार पिघल जाए और दूसरों को भी शांति मिले। जब हमारी बातों से औरों को सुकून मिलता है, तो हमारा अपना मन भी स्वतः ही शीतल हो जाता है। फिर वे कितनी ख़ूबसूरती से बताते हैं कि जब हृदय में प्रभु के लिए सच्चा प्रेम बस जाता है, तो हमारे मुख से मोतियों और हीरों जैसे अनमोल वचन झरते हैं जिनकी कीमत अपरंपार है।
