बारी-बारी आपणीं , चले पियारे म्यंत। तेरी बारी रे जिया , नेड़ी आवै निंत॥ 419॥
“Taking turns, my beloved, let us walk. O my heart, it is your turn; sleep is coming to you.”
— कबीर
अर्थ
बारी-बारी से चलते हैं मेरे प्रियतम। हे प्राण, अब तुम्हारी बारी है, तुम्हें नींद आ रही है।
विस्तार
कबीर इस दोहे में जीवन और प्रेम की ताल को बड़े खूबसूरत ढंग से समझाते हैं। जैसे प्रेमी के साथ कदम-कदम मिलकर चलते हैं, वैसे ही जीवन के हर अनुभव की अपनी बारी आती है। 'तेरी बारी रे जिया' कहकर वे हृदय को याद दिलाते हैं कि सब कुछ अपनी बारी पर ही होता है, और अब तुम्हारे विश्राम, शांति, या शायद जीवन-चक्र के अंत की बारी है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में हर मोड़ को सहजता से स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि हर स्थिति का अपना समय होता है।
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