गुरु पारस को अन्तरो , जानत है सब सन्त। वह लोहा कंचन करे , ये करि लेय महन्त॥ 435॥
“The saints all know the Guru to be the true gem, / For he can turn the iron into gold, O great sage.”
— कबीर
अर्थ
सभी संतों को यह ज्ञान है कि गुरु ही असली रत्न हैं। वे लोहे को सोना बना सकते हैं, हे महन्त।
विस्तार
कबीर दास जी कहते हैं कि सभी संत गुरु और पारस पत्थर के बीच का सच्चा अंतर जानते हैं। पारस पत्थर तो केवल लोहे को छूकर सोना बना देता है, पर गुरु की महिमा उससे भी कहीं बढ़कर है। गुरु तो अपने शिष्य को सोने से भी बढ़कर, अपने जैसा ही एक महान संत या महंत बना देते हैं। यह आध्यात्मिक परिवर्तन शिष्य को ज्ञान और आत्मज्ञान से भरकर जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य तक पहुंचाता है।
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