अबुध सुबुध सुत मातु पितु , सबहि करै प्रतिपाल। अपनी और निबाहिये , सिख सुत गहि निज चाल॥ 462॥
“Father, mother, son, and daughter, who sustains all, Keep yourself and your kin, and lead your own way.”
— कबीर
अर्थ
अबुध, सुबुध, सुत, मातु, पितु - ये सब को पालने वाला (पालन करने वाला) है। अपनी और अपने संबंधी को निभाओ, और अपनी राह पर चलो।
विस्तार
यह दोहा हमें समझाता है कि जहाँ माता-पिता और बच्चे सब एक-दूसरे का सहारा बनते हैं, वहीं जीवन की असली राह हमें खुद ही बनानी होती है। कबीरदास जी कहते हैं कि अपनी पहचान बनाए रखना और अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर अपने रास्ते पर चलना ही सबसे बड़ी समझदारी है। यह हमें सिखाता है कि अपने भीतर की शक्ति को पहचानकर हमें अपनी यात्रा खुद ही तय करनी चाहिए, बिना किसी पर पूरी तरह निर्भर हुए।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
← Prev59 / 10
