कबीर समूझा कहत है , पानी थाह बताय। ताकूँ सतगुरु का करे , जो औघट डूबे जाय॥ 475॥
“Kabir says, 'Tell me the true measure of water.' I shall do what the True Guru instructs, even if I am overwhelmed by the current.”
— कबीर
अर्थ
कबीर कहते हैं कि मुझसे पानी की गहराई बता देना। मैं तो सतगुरु का पालन करूंगा, भले ही मैं प्रचंड धारा में डूब जाऊं।
विस्तार
कबीर यहाँ 'पानी की थाह' को आध्यात्मिक ज्ञान की गहरी सच्चाई का प्रतीक बता रहे हैं। वे समझाते हैं कि वे अपनी समझ या बुद्धिमत्ता पर निर्भर नहीं रहेंगे। वे तो सच्चे गुरु के निर्देशों पर पूरी तरह समर्पित होंगे, भले ही जीवन की धारा उन्हें कितनी भी मुश्किल लगे। यह दोहा गहरी विनम्रता और पूर्ण विश्वास की भावना को बखूबी दर्शाता है।
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