यह सतगुरु उपदेश है , जो मन माने परतीत। करम भरम सब त्यागि के , चलै सो भव जल जीत॥ 481॥
“This is the teaching of the true Guru; whoever abandons the mind and all actions, and walks thus, conquers the ocean of existence.”
— कबीर
अर्थ
यह सतगुरु का उपदेश है कि जो व्यक्ति मन और सभी कर्म-भ्रम का त्याग करके चलता है, वह संसार रूपी सागर को जीत लेता है।
विस्तार
कबीर साहब यहाँ जीवन के सबसे गहरे सत्य को उजागर कर रहे हैं। 'भव जल' यानी संसार सागर, जो हमारी मोह-माया और कर्मों के बंधनों से भरा पड़ा है। इस विशाल सागर को पार करने का एक ही रास्ता है: मन के सारे भ्रम और कर्मों के जाल को त्याग देना, क्योंकि केवल दिखावटी कर्म हमें मुक्ति नहीं दिला सकते। जब हम पूरी श्रद्धा से सतगुरु के उपदेशों पर चलते हुए, अपने अहंकार और आसक्तियों को छोड़ देते हैं, तभी हम इस भव सागर को जीतकर मोक्ष प्राप्त करते हैं।
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