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गुरु-गुरु में भेद है , गुरु-गुरु में भाव। सोइ गुरु नित बन्दिये , शब्द बतावे दाव॥ 490॥

Among the gurus, there is a difference; among the gurus, there is a feeling. Such a guru, O captive, who reveals the word, is always near.

कबीर
अर्थ

गुरुओं के बीच अंतर है, और गुरुओं के बीच भावना भी है। हे बंदी, जो शब्द बताते हैं, ऐसे गुरु सदैव निकट रहते हैं।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ गुरुओं के बीच के बारीक अंतर को समझा रहे हैं। वे कहते हैं कि हर गुरु एक जैसा नहीं होता; किसी में ज्ञान का गहरा भाव होता है तो कोई केवल ऊपरी बातें बताता है। हमें उस गुरु को हमेशा नमन करना चाहिए जो केवल शब्द ही न दे, बल्कि उन शब्दों के पीछे छिपी गहरी सच्चाई और जीवन का असली दांव (भेद) समझा दे। ऐसे गुरु ही हमारी आत्मा को जगाकर सत्य का मार्ग दिखाते हैं।

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