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सद्गुरु ऐसा कीजिये , लोभ मोह भ्रम नाहिं। दरिया सो न्यारा रहे , दीसे दरिया माहि॥ 493॥

Oh true Guru, please do this: let there be no greed, attachment, or illusion. The river remains distinct, giving from the river itself.

कबीर
अर्थ

सद्गुरु से यह प्रार्थना है कि लोभ, मोह और भ्रम का त्याग किया जाए। यह उपमा बताती है कि नदी (दरिया) अपने आप में अलग और विशिष्ट बनी रहती है, जबकि वह स्वयं ही दूसरों को देती रहती है।

विस्तार

सद्गुरु से यह प्रार्थना है कि हमारे मन से लोभ, मोह और भ्रम जैसी चीज़ें दूर हो जाएँ, ताकि हमारा भीतर साफ हो सके। जैसे दरिया सबको देते हुए भी अपनी पहचान बनाए रखता है, वैसे ही हमें भी संसार में रहते हुए भी अपनी असली आत्मा को शुद्ध और अलग रखना है। यह हमें सिखाता है कि हम भले ही दुनिया का हिस्सा हों, पर हमारी अपनी एक अलग पहचान और भीतर की पवित्रता हमेशा बनी रहनी चाहिए।

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