नहीं शीतल है चन्द्रमा , हिंम नहीं शीतल होय। कबीरा शीतल सन्त जन , नाम सनेही सोय॥ 72॥
“The moonlight is not cool, nor is the snow. The beloved name of the saintly people is the true coolness.”
— कबीर
अर्थ
चन्द्रमा और हिम दोनों शीतल नहीं हैं। संतों के लिए नाम ही सच्ची शीतलता है।
विस्तार
कबीर दास जी कहते हैं कि चाँद की शीतलता या बर्फ की ठंडक बस कुछ पल की होती है, ये बाहरी और क्षणभंगुर है। असल शीतलता तो संतों के प्यारे नाम में, यानी उनके बताए मार्ग और भक्ति में मिलती है। यह नाम ही हमारे मन को ऐसी शांति और सुकून देता है जो किसी और चीज़ से नहीं मिल सकता। ये मन को सच्ची ठंडक और आराम पहुँचाता है।
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