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ऊँचे पानी न टिके , नीचे ही ठहराय। नीचा हो सो भरिए पिए , ऊँचा प्यासा जाय॥ 86॥

High waters cannot remain, they settle down below. Let the low ones fill up their thirst, and the high ones may wander dry.

कबीर
अर्थ

ऊँचे पानी का ठहराव ऊँचा नहीं रह पाता, वह नीचे ही ठहर जाता है। इसलिए, जो निचले स्तर पर हैं, उन्हें पहले पानी पिला देना चाहिए, और जो ऊँचे स्तर पर हैं, उन्हें प्यासा ही रहने देना चाहिए।

विस्तार

यह दोहा हमें समझाता है कि जैसे ऊँचा पानी ठहरता नहीं, बल्कि नीचे आकर टिकता है, वैसे ही घमंड या ऊँचाई का दिखावा भी स्थायी नहीं होता। कबीरदास जी कहते हैं कि जो नम्र और विनम्र होते हैं, वही जीवन का सच्चा रस पी पाते हैं और तृप्त होते हैं। इसके विपरीत, जो खुद को ऊँचा समझते हैं, वे अंततः प्यासे ही रह जाते हैं। यह विनम्रता और ज़मीन से जुड़े रहने का बड़ा प्यारा संदेश है।

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