शीलवन्त सबसे बड़ा , सब रतनन की खान। तीन लोक की सम्पदा , रही शील में आन॥
“Shīlavanta is the greatest, a mine of all gems. In Shīl, the wealth of the three worlds resides.”
— कबीर
अर्थ
शीलवन्त सबसे बड़ा है और वह सभी रत्नों का भंडार है। तीन लोकों की सम्पत्ति शील (सदाचार) में विद्यमान है।
विस्तार
कबीर दास जी यहाँ शील, यानी हमारे अच्छे स्वभाव और चरित्र को सबसे बड़ा खजाना बता रहे हैं। वे कहते हैं कि यह तो रत्नों की खान से भी बढ़कर है, जहाँ तीनों लोकों की सारी दौलत आकर बस जाती है। असल में, इसका मतलब ये है कि सच्ची समृद्धि, चाहे वो धन की हो या मन की शांति की, सब हमारे भीतर के गुणों और सदाचार से ही आती है। यानी बाहरी चमक-दमक से ज़्यादा हमारे अंदर का नेक स्वभाव ही हमें सबसे अमीर बनाता है।
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