“Illusion and shadow are alike, few truly understand. It follows one who turns their back, yet flees when confronted.”
माया और छाया एक समान होती हैं, यह बात कोई कम जानता है। जो व्यक्ति भागता है, वह पीछे लगे और सामने भागे, दोनों तरह के कार्यों में उलझा रहता है।
कबीर जी इस दोहे में 'माया' और 'छाया' को एक जैसा बताते हुए हमें एक गहरा सबक सिखाते हैं। वे कहते हैं कि बहुत कम लोग ही इस सच्चाई को समझ पाते हैं कि ये दोनों कितनी समान हैं। दरअसल, जैसे छाया से मुँह फेरो तो वह पीछे लग जाती है और सामने आओ तो भाग जाती है, ठीक वैसे ही माया भी है। यह हमें सिखाता है कि अगर हम इच्छाओं और मोह-माया से भागेंगे, तो वे हमारा पीछा नहीं छोड़ेंगी, पर अगर हम उन्हें समझकर उनका सामना करेंगे, तो वे खुद ही दूर हो जाएंगी।
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