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कबीरा धीरज के धरे , हाथी मन भर खाय। टूट एक के कारने , स्वान घरै घर जाय॥ 85॥

Kabir held patience in his heart, the elephant ate till it was full. Due to the breaking of one thing, the dog ran from house to house.

कबीर
अर्थ

कबीरा धीरज के धरे, हाथी मन भर खाय। टूट एक के कारने, स्वान घरै घर जाय॥ इसका शाब्दिक अर्थ है कि कबीर ने धैर्य को अपने हृदय में धारण किया, और हाथी ने मन भरकर भोजन किया। एक चीज़ के टूटने के कारण, कुत्ता घर से घर भटकने लगा।

विस्तार

कबीर दास जी इन पंक्तियों में धीरज और हमारी छोटी बातों पर अत्यधिक प्रतिक्रिया देने की प्रवृत्ति का सुंदर चित्रण करते हैं। वे बताते हैं कि एक हाथी धैर्य से अपना पेट भरता है, लेकिन एक मामूली सी चीज़ के टूट जाने पर कुत्ता हर घर भटकता फिरता है। यह हमें समझाता है कि जीवन में छोटी-मोटी चीज़ों के नुकसान पर हमें अपनी शांति नहीं खोनी चाहिए, बल्कि धैर्य से काम लेना चाहिए। हमें अनावश्यक चिंता और बेचैनी से बचना चाहिए।

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