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जो तु चाहे मुक्ति को , छोड़ दे सबकी आस। मुक्त ही जैसा हो रहे , सब कुछ तेरे पास॥ 199॥

If you wish for liberation, let go of all attachments. As you are becoming free, everything is with you.

कबीर
अर्थ

यदि तुम मुक्ति चाहते हो, तो सभी आसक्तियों को त्याग दो। जैसे ही तुम मुक्त हो रहे हो, सब कुछ तुम्हारे पास है।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ समझा रहे हैं कि अगर हम सच्ची आज़ादी चाहते हैं, जिसे 'मुक्ति' कहते हैं, तो हमें दूसरों से या दुनिया से हर तरह की उम्मीद छोड़ देनी होगी। वे कहते हैं कि जब हम सब कुछ छोड़ देते हैं, सारी आसक्ति त्याग देते हैं, तो एक अजीब जादू होता है। तब हमें एहसास होता है कि असल में सब कुछ हमारे पास ही तो है, हमें बाहर कहीं कुछ खोजने की ज़रूरत ही नहीं थी। यह हमें सिखाता है कि भीतर की शांति और पूर्णता ही असली दौलत है।

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