“At times on velvet soft I lie, at times on open earth I rest.At times I let my boat drift by, to revel in the waves' behest.”
कभी मखमल के बिस्तर पर सोना, कभी खुली धरती पर आराम करना। कभी नाव को बहता छोड़ देना और लहरों का आनंद लेना।
यह खूबसूरत दोहा हमें जीवन के हर रूप को अपनाने की शिक्षा देता है। यह कहता है कि कभी मखमली बिस्तर पर आराम मिले तो कभी खुली धरती पर माँ की गोद जैसा सुकून। इसका मूल मंत्र यही है कि हम किसी एक तरह के अनुभव से चिपके न रहें, बल्कि जो भी जीवन हमें दे, उसे स्वीकार करें। यह एक ऐसी नाव की तरह है जिसे हम बस बहने देते हैं, लहरों के साथ आगे बढ़ने का आनंद लेते हैं। इस दोहे का ज्ञान यह है कि हमें जीवन की धारा के साथ बहना चाहिए, शांति और तूफानों दोनों का लुत्फ़ उठाना चाहिए, और हर पल में, हर परिस्थिति में खुशी और संतोष खोजना चाहिए।
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