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તું ઈશ્ક છે યા મહેરબાની યા રહમ?
હસતાં ઝરે મેાતી લબે તે શું, સનમ!

Are you love, or kindness, or perhaps compassion?When you laugh, pearls spill from your lips, what wonder, O beloved!

कलाપી
अर्थ

क्या तुम इश्क़ हो या मेहरबानी या रहम? जब तुम हँसते हो तो तुम्हारे लबों से मोती झड़ते हैं, क्या बात है, ऐ सनम!

विस्तार

यह खूबसूरत शेर महबूब के प्रति गहरी प्रशंसा व्यक्त करता है। शायर इतना मोहित है कि वह महबूब के वास्तविक स्वरूप पर सवाल उठाता है, पूछता है कि क्या वे खुद प्रेम हैं, दयालुता हैं, या रहमदिल हैं। वे महबूब की मुस्कान से पूरी तरह मंत्रमुग्ध हैं, जिसे इतना उज्ज्वल और कीमती बताया गया है कि ऐसा लगता है जैसे उनके होंठों से मोती बिखर रहे हों। यह अचंभा और गहरे स्नेह की एक मार्मिक अभिव्यक्ति है, जो महबूब के मनमोहक आकर्षण और शायर के उनके असाधारण सौंदर्य और कोमल स्वभाव के प्रति विस्मय को उजागर करता है।

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