“These petty pains, I cannot bear;Grant me one great sorrow, beyond all compare.”
ये छोटे-छोटे दर्द सहन नहीं होते, मुझे एक बहुत बड़ा और अपार दर्द दे।
यह शेर एक गहरी भावना को व्यक्त करता है। शायर कहते हैं कि छोटे-छोटे दर्द अब सहन नहीं होते। वे इन नगण्य पीड़ाओं से थक गए हैं। इसके बजाय, वे एक बहुत बड़ा, असीमित दर्द चाहते हैं। यह एक अजीबोगरीब प्रार्थना है, जिसमें शायद यह भावना छिपी है कि एक विशाल दुख का सामना करना, कई छोटे-छोटे दुखों से निपटने की तुलना में आसान हो सकता है। हो सकता है कि वे एक ऐसे दर्द की तलाश में हों जो इतना बड़ा हो कि वह सभी छोटी-मोटी परेशानियों को ढक ले, या जो किसी बड़े समाधान की ओर ले जाए। यह उस व्यक्ति की भावना है जो लगातार छोटे-मोटे झटकों से परेशान होकर एक निर्णायक और विशाल चुनौती की कामना करता है।
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