“From what a world did I seek the boon of light,A world that cannot help but call a diamond a mere stone.”
मैंने किस दुनिया से प्रकाश की कृपा मांगी, एक ऐसी दुनिया जो हीरे को पत्थर कहे बिना नहीं रह सकती। ऐसी दुनिया से ज्ञान की अपेक्षा करना व्यर्थ है जो सच्ची कीमत को पहचानने में असमर्थ है।
ज़रा सोचिए, आप उन लोगों से मदद या रोशनी मांग रहे हैं जो एक कीमती हीरे और एक साधारण पत्थर में फ़र्क़ भी नहीं कर पाते। यह खूबसूरत शेर बिलकुल यही भावना व्यक्त करता है। कवि उस दुनिया से 'प्रकाश' या पहचान माँगने पर अफ़सोस जताते हैं जिसमें परखने की क्षमता नहीं, जो सच्ची क़ीमत नहीं समझ पाती। यह एक कोमल शिकायत है कि उन्हें ऐसी जगह गलत समझा जा रहा है या कम आँका जा रहा है जो असलियत को समझ ही नहीं पाती। यह ऐसा है जैसे आप किसी ऐसे व्यक्ति के सामने अपना दिल खोल रहे हैं जो आपकी अहमियत नहीं समझता, आपकी चमक को कुछ ख़ास नहीं मानता।
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