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ग़ज़ल

खबर पड़ी कि छूट जाएगी आजकल में गाँठ

خبر پڑی کہ چھوٹ جائے گی آجکل میں گانٹھ
मरीज़· Ghazal· 9 shers

यह ग़ज़ल जीवन की जटिल 'गांठों' को रूपकात्मक ढंग से दर्शाती है, जो उलझनों, भावनात्मक बंधनों और बाधाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह इन गांठों के खुलने और कसने पर प्रकाश डालती है, चाहे वे भूली हुई भावनाओं में हों, उलझे हुए विचारों में, या प्रेम की सीमाओं में, और उस अदृश्य शक्ति पर सवाल उठाती है जो किसी के मार्ग में रुकावटें पैदा करती है।

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1
ખબર પડી કે છૂટી જાશે આજકાલમાં ગાંઠ, હૃદયને ભૂલી ગયા, વાળીને રૂમાલમાં ગાંઠ.
यह महसूस हुआ कि गांठ आज-कल में खुल जाएगी। उन्होंने दिल को भुला दिया और उसके बजाय रुमाल में गांठ बांध ली।
2
દિલમાં ગૂંચ છે કોઈ, છે ખયાલમાં ગાંઠ, પણ એની સામે રહે છે બધા સવાલમાં ગાંઠ.
मेरे दिल में कोई उलझन नहीं है और न ही मेरे विचारों में कोई गांठ है, लेकिन उसके सामने मेरे सारे सवाल उलझ जाते हैं।
3
નજર અમારી તો ઊંચી છે, અમને જાણ નથી, કે કોણ બાંધી રહ્યું છે, અમારી ચાલમાં ગાંઠ.
हमारी नज़र तो ऊँची है, हमें पता नहीं कि कौन हमारी चाल में गाँठ बाँध रहा है।
4
શ્વાસ સહેલથી ખેંચાય છે, દમ નીકળે, ગળામાં કેવી બાંધી તમે વહાલમાં ગાંઠ!
आसानी से न तो साँस ली जाती है और न ही जान निकलती है। प्यार में तुमने मेरे गले में कैसी यह गाँठ बाँध दी है!
5
પણ એને ખોલવા નવરાશ છે હિંમત છે, મને ખબર છે કે ક્યાં ક્યાં છે મારા હાલમાં ગાંઠ.
मुझे पता है कि मेरी वर्तमान स्थिति में कहाँ-कहाँ गाँठें हैं। पर उन सभी को सुलझाने के लिए न तो मेरे पास फुर्सत है और न ही हिम्मत।
6
અહીં સમયના સકંજાથી કોણ છૂટે છે? ઘડી ઘડીની પડેલી છે સાલ સાલમાં ગાંઠ.
यहां समय की कठोर पकड़ से कोई बच नहीं सकता। हर गुजरता पल हर साल में एक नई गांठ डाल देता है।
7
તમારી યાદના ફેરાઓ કેવા મંગળ છે! હજાર બાંધીને છોડી દીધા ખયાલમાં ગાંઠ.
आपकी यादों के फेरे कितने शुभ और मंगलमय हैं! ख्यालों में मैंने हज़ारों गांठें बांधीं और फिर उन्हें खोल दिया।
8
જીવનની દોરી ઉભયની બહુ નિકટ થઈ ગઈ, પડી જવાની હશે એમાં આજકાલમાં ગાંઠ.
दोनों के जीवन की डोरियाँ बहुत निकट आ गई हैं, और आज या कल उनमें एक गाँठ पड़ जाएगी।
9
મરીઝગાળીને એમાં પી રહ્યા છો શરાબ, કદી પીવાની વાળી'તી જે રૂમાલમાં ગાંઠ?
मरीज़, तुम उसी में से शराब छानकर पी रहे हो, जिसमें तुमने कभी न पीने की कसम खाई थी (रुमाल में गाँठ बाँधी थी)।
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