“If someone forgets us, what cause for complaint? 'Mareez', whose memory did we always recall?”
यदि कोई हमें भूल जाए तो शिकायत किस बात की? 'मरीज़', हमने खुद भी तो हमेशा किसकी याद रखी है?
अगर कोई हमें भूल जाए, तो शिकायत कैसी? कवि 'मरीज़' बड़ी ख़ूबसूरती से यही सवाल पूछते हैं और तुरंत अपना ध्यान अंदर की ओर मोड़ लेते हैं। वे सोचते हैं, 'मुझे भला किसकी याद हमेशा सताती है?' यह शेर एक गहरी मानवीय सच्चाई को उजागर करता है। यदि हमारा अपना मन हमेशा किसी ख़ास व्यक्ति की यादों में डूबा रहता है, तो हमें दूसरों के हमें भूल जाने पर शिकायत करने या दुखी होने का क्या हक़ है? मरीज़ का सुझाव है कि दूसरों को याद करने का हमारा अपना अनुभव इतना गहरा होता है कि किसी और के हमें भूल जाने का विचार उसके सामने महत्वहीन लगता है। यह हमें खुद के भावनात्मक स्वरूप पर चिंतन करने की एक मीठी याद दिलाता है।
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