“In a moment, you too felt the effect of its company, And returning, you found the time felt like a messenger's slow journey.”
एक पल में तुम्हें भी उसकी संगति का असर महसूस हुआ। वापस लौटते हुए तुम्हें भी इतना समय लगा, मानो वह किसी संदेशवाहक का धीमा सफर हो।
यह दोहा बताता है कि किसी की संगति का असर कितनी जल्दी और गहराई से पड़ता है। कवि कहता है कि देखते ही देखते, तुम्हें भी उसकी संगत का गहरा प्रभाव महसूस हुआ। और उसी गहरे जुड़ाव या प्रभाव के कारण, तुम्हें वापस अपनी असल स्थिति में लौटने में या अपने रास्ते पर आने में एक लंबा समय लग गया। यह दर्शाता है कि हम कितनी तेज़ी से किसी के साथ से प्रभावित हो सकते हैं और फिर उस प्रभाव से निकलकर वापस अपने आप को पाना कितना मुश्किल हो सकता है।
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