दिन तो खाय गमायो री, रैन गमाई सोय।
“The day I wasted eating, dear, the night I lost in sleep.”
— मीराबाई
अर्थ
मैंने अपना दिन खाने में गँवा दिया और रात सोने में खो दी।
विस्तार
यह दोहा हमें समझाता है कि हम अक्सर अपने दिन और रात व्यर्थ ही गँवा देते हैं। कवि कहते हैं कि दिन तो खाने-पीने में बीत जाता है और रात सोने में। यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने जीवन का समय सिर्फ इन मूलभूत कार्यों में ही बिता रहे हैं, या कुछ अधिक सार्थक भी कर रहे हैं। यह एक मधुर स्मरण है कि हमें अपने कीमती समय का सदुपयोग करना चाहिए और जीवन के गहरे अर्थों को खोजना चाहिए, ताकि हमारा जीवन सिर्फ एक दैनिकचर्या का चक्र बनकर न रह जाए।
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