सीरत से गुफ़्तुगू है क्या मो'तबर है सूरत
है एक सूखी लकड़ी जो बू न हो अगर में
“Is the conversation derived from character, or is it the appearance that is reliable? It is like a dry piece of wood that cannot be lit by fire.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
असली महत्व चरित्र का है, बाहरी सुंदरता का नहीं। जैसे अगर (सुगंधित लकड़ी) बिना खुशबू के केवल एक सूखी लकड़ी है, वैसे ही बिना अच्छे स्वभाव के इंसान की सूरत का कोई मोल नहीं होता है।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर का एक गहरा सवाल है। शायर पूछते हैं कि क्या किसी इंसान की पहचान उसके बाहरी रूप से होती है, या उसके चरित्र से? वह कहते हैं कि यह जानना बहुत मुश्किल है। जिस तरह एक सूखी लकड़ी में महक नहीं होती, वैसे ही बाहरी दिखावे से किसी के दिल की गहराई नहीं समझी जा सकती। मिर्ज़ा तक़ी मीर हमें समझाते हैं कि असली वजूद तो अंदर होता है, बाहर नहीं!
