न निगह ने पयाम ने वा'दा
नाम को हम भी यार रखते हैं
“Neither the glance nor the message, nor the promise, We also keep the name of the beloved.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
न नज़रों ने, न पैगाम ने, न वादे ने, हम भी नाम को यार रखते हैं।
विस्तार
देखिए, यह शेर बहुत गहरा है। शायर कहते हैं कि नज़रों का मिलना, कोई वादा या कोई संदेश... ये सब तो वक़्त के साथ बदल जाते हैं। लेकिन जो चीज़ शायर के लिए सबसे अहम है, वो है 'नाम'। यानी, महबूब की पहचान, उसका नाम ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा है। यह इश्क़ है जो वक़्त से परे है, जो सिर्फ़ यादों और नाम में ज़िंदा रहता है।
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