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याँ हुए 'मीर' तुम बराबर ख़ाक
वाँ वही नाज़ ओ सरगिरानी है

Oh Mir, you are nothing but dust, / That same pride and arrogance remain.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ऐ मीर, तुम तो बस धूल के समान हो, फिर भी वही नज़ा और सरगर्मी बाकी है।

विस्तार

यह शेर कला की आत्मा और व्यक्तिगत नज़ाकत को बयां करता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि भले ही शरीर का अस्तित्व धूल बनकर मिट जाए, लेकिन शायर का वह अनोखा अंदाज़, वह नज़ाकत और सरगिरानाई... वह कभी खत्म नहीं होगी। यह एक गहरा दावा है कि असली 'हुस्न' हमेशा ज़िंदा रहता है।

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