तू है किस नाहिए से ऐ दयार-ए-इश्क़ क्या जानूँ
तिरे बाशिंदगाँ हम काश सारे बेवफ़ा होते
“From what realm, oh benefactor of love, do you exist? I do not know. If only all your inhabitants were disloyal.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हे प्रेम के दाता, आप किस लोक से हैं, मैं नहीं जानती। काश आपके सभी निवासी बेवफ़ा होते।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की अनिश्चितता और दर्द को बयान करता है। शायर पूछते हैं कि ये 'इश्क़' किस जगह से आया है, कि मैं इसे जानूँ कैसे। वह एक गहरे निराशा में हैं। वह काश यह दुआ करते हैं कि महबूब के बाशिंदे सब बेवफ़ा होते। क्योंकि यह वफ़ा और ये चाहत, ये सब उन्हें बहुत दर्द दे रही है। यह विरह का ऐसा दर्द है, जो हर आशिक को महसूस होता है।
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