जुदाई के हालात मैं क्या कहूँ
क़यामत थी एक एक साअत के बाद
“How can I describe the circumstances of separation? Every hour felt like the Day of Judgment.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जुदाई के हालात मैं क्या कहूँ, क़यामत थी एक एक साअत के बाद। (अर्थ: मैं विरह की परिस्थितियों का वर्णन कैसे करूँ? हर एक घंटा क़यामत जैसा था।)
विस्तार
यह शेर जुदाई के उस गहरे दर्द को बयां करता है, जिसे शब्दों में समेटना नामुमकिन है। शायर कह रहे हैं कि विरह की हालत इतनी भयानक थी कि यह किसी क़यामत से कम नहीं थी। उनके लिए, समय का गुज़रना ही एक सज़ा थी; हर एक घंटा ऐसा महसूस होता था, जैसे कोई बड़ा हादसा हो रहा हो।
