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कोई हुआ न दस्त-बसर शहर-ए-हुस्न में
शायद नहीं है रस्म-ए-जवाब सलाम याँ

No one has managed to live a life in this city of beauty, Perhaps the custom of replying to a greeting is not followed here.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

कोई व्यक्ति इस सौंदर्य के शहर में जीवनयापन नहीं कर पाया होगा, शायद यहाँ अभिवादन का जवाब देने की प्रथा नहीं है।

विस्तार

यह शेर हुस्न की असीमित शक्ति को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि 'हुस्न का शहर' इतना जादुई है कि कोई भी उसमें बसकर नहीं रह पाया। यह खूबसूरती इतनी गहरी है कि वहाँ के सामान्य नियम, जैसे कि किसी को सलाम का जवाब देना, शायद अस्तित्व में ही नहीं हैं। यह एक ऐसी खूबसूरती की बात है जो हर रिवाज़ से ऊपर होती है।

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