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हर शब गली में उस की रोते तो रहते हो तुम
इक रोज़ 'मीर' साहब तूफ़ान हो रहा है

In every street, you cry for her, you remain so, One day, 'Mir' sahib, a storm is coming.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हर रात तुम गली में उसका रोते रहते हो, एक दिन 'मीर' साहब, तूफ़ान आ रहा है।

विस्तार

यह शेर उस पल का वर्णन करता है जब रोज़मर्रा का ग़म अचानक एक बड़े तूफ़ान में बदल जाता है। शायर कहते हैं कि आप तो हर रात उस महबूब की गली में रोते रहते हैं... आपका दुख एक आदत बन चुका है। लेकिन मिर्ज़ा तय़मिर समझाते हैं कि यह रोज़ का रोना... बस एक बहाना है। क्योंकि एक दिन... यह ज़िंदगी का तूफ़ान होगा! यह ग़म नहीं... बल्कि एक बड़ा बदलाव होगा!

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पाठ
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