कोहकन ओ मजनूँ की ख़ातिर दश्त-ओ-कोह में हम न गए
इश्क़ में हम को 'मीर' निहायत पास-ए-इज़्ज़त-दाराँ है
“For the sake of Kohakan and Majnu, we did not go into the desert and mountains; in love, we are, 'Mir', extremely near to the keepers of honor.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कोहकन और मजनूँ के लिए हम रेगिस्तान और पहाड़ों में नहीं गए; इश्क़ में हम को 'मीर' इज़्ज़त वालों के बहुत करीब हैं।
विस्तार
यह शेर, यह एक बहुत गहरा एहसास है। शायर कह रहे हैं कि हम प्रेम के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं—चाहे वो रेगिस्तान हो या पहाड़। पर एक सीमा है, एक हद है.... जो हम पार नहीं कर सकते। हमारे लिए, अपने सम्मान और इज़्ज़त से बढ़कर कुछ नहीं है। यह शेर स्वाभिमान की बात करता है।
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