चली जाती है धड़कों ही में जाँ भी
यहीं से कहते हैं जाँ को रवाँ है
“The soul also departs within the beats of the heart, From this very place, they declare the soul is flowing.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अर्थ है कि जान (आत्मा) धड़कनों में ही चली जाती है, और यहीं से कहते हैं कि जान बहती है।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी के सबसे बड़े विरोधाभास को बयां करता है। शायर कहते हैं कि हमारी जान, हमारी धड़कनों के साथ ही कहीं खो रही है.... लेकिन हम इसी जगह से यह दावा करते हैं कि जान तो रवाँ है, कि ज़िंदगी बह रही है। यह एक बहुत गहरा एहसास है, कि हम अपनी तकलीफों को देखना नहीं चाहते, इसलिए जीना जारी रखने का दिखावा करते हैं।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
