कोई हम से खुलते हैं बंद उस क़बा के
ये 'उक़्दे खुलेंगे किसू की दु'आ से
“Some open the closed knot of that garment for us, These 'Uqde will open with the grace of a prayer.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कोई हमसे खुलते हैं बंद उस क़बा के, ये 'उक़्दे खुलेंगे किसी की दुआ से।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर का है और यह नियति के रहस्य को दर्शाता है। 'क़बा' से मतलब जीवन या कोई गहरा राज़ है, जिसके 'उक़्दे' बंधे हुए हैं। शायर कहते हैं कि इस क़बा के ये गाँठें किसी और की दुआ से ही खुल सकती हैं। यह एक ख़ूबसूरत तफ़कर है कि इंसान की सबसे उलझी हुई समस्या का हल भी कहीं बाहर, किसी की इल्तिजा में छिपा है।
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