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तुझ से क्या क्या तवक्क़ोएँ थीं हमें
सो तिरे ज़ुल्म ने निरास किया

What expectations I held from you, Your cruelties have left them all in vain.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

तुझसे हमारी क्या-क्या उम्मीदें थीं, तुम्हारे ज़ुल्म ने उन्हें सब बेकार कर दिया।

विस्तार

यह शेर उस टूटे हुए दिल की दास्तान है, जहाँ उम्मीदें और हकीकत एक-दूसरे से टकराती हैं। शायर यहाँ अपने महबूब से पूछ रहे हैं कि 'मैंने तुझसे क्या-क्या सपने देखे थे?' और जवाब यह है कि तेरे ज़ुल्म ने उन सपनों को चकनाचूर कर दिया। यह बस एक इश्क़ का दर्द नहीं है, बल्कि हर उस इंसान का दर्द है, जिसने किसी पर बहुत भरोसा किया हो और धोखा खाया हो।

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