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तिरी हो चुकी ख़ुश्क मिज़्गाँ की सब
लहू अब जिगर में मगर कुछ नहीं

The lush eyebrows, once vibrant, are now dry; all the blood is in the heart, yet nothing remains.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

तुम्हारी वो हरी-भरी पलकें जो कभी ताज़गी से भरी थीं, अब सूख चुकी हैं; सारा खून तो दिल में है, पर अब कुछ भी नहीं बचा है।

विस्तार

यह शेर गहरे भावनात्मक थकावट को बयान करता है। शायर कहते हैं कि जो आँसू (आँखों का रक्त) कभी महबूब के लिए बहते थे, और जो हमने अपने दिल में संजोए थे, वे सब अब सूख चुके हैं। यह सिर्फ आँसुओं का खोना नहीं है, बल्कि यह एहसास है कि दर्द भी फीका पड़ गया है, और दिल में कुछ बचा ही नहीं। यह उस मोहब्बत की खामोश तबाही को दर्शाता है जो अपना वजूद खो चुकी है।

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