दर-पर्दा वो ही मा'नी मुक़व्वम न हों अगर
सूरत न पकड़े काम फ़लक के सबात का
“If the curtain and the veil are not the same meaning, the heavens' stability cannot capture the sight.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर दर-पर्दा और मायने (अर्थ) एक समान न हों, तो फ़लक (आकाश) की स्थिरता का स्वरूप (नज़ारा) नहीं पकड़ पाएगा।
विस्तार
यह शेर हमें सिखाता है कि दुनिया में जो कुछ भी दिखता है, वह पूरी सच्चाई नहीं होती। शायर कहते हैं कि न तो पर्दा और न ही रूप, आसमान की स्थिरता को समेट सकते। यानी, हर चीज़ की एक गहराई होती है, एक सच्चाई होती है जो न आँखों से दिखती है और न बाहरी दिखावे में समा सकती है। यह जीवन के गहरे रहस्यों पर एक शानदार तफ़कर है।
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