कम किसू को 'मीर' की मय्यत की हाथ आई नमाज़
ना'श पर उस बे-सर-ओ-पा की बला कसरत हुई
“How much did the funeral of 'Mir's' body come to the prayer? At the feast, the curse of that headless body was a great ordeal.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कम से कम 'मीर' की मय्यत पर नमाज़ के लिए, उस बे-सर-ओ-पा की बला का ना'श पर कसरत हुई।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ एक मौत की बात नहीं करता, यह गहरे गम की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि किसी को 'मीर' की मय्यत पर नमाज़ देने का मौका मिलना कोई बड़ी बात है, पर असली बात तो उस ग़म की है जो उनकी मौत ने दुनिया में फैला दिया। यह ग़म इतना गहरा था कि वह सिर्फ़ कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहा.... बल्कि हर दिल को छू गया। यह एक कलाकार के वक़्त-ए-फ़ना का दर्द है।
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