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पाँव मेरा कल्बा-ए-अहज़ाँ में अब रहता नहीं
रफ़्ता रफ़्ता उस तरफ़ जाने की मुझ को लत हुई

My foot no longer dwells in the valley of sorrow, I have grown addicted to going in that direction, little by little.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मेरा पाँव अब दुःख के वैली (कल्बा-ए-अहज़ाँ) में नहीं रहता; मुझे धीरे-धीरे उस दिशा में जाने की आदत पड़ गई है।

विस्तार

यह शेर एक बहुत बड़े बदलाव को दिखाता है। शायर कह रहे हैं कि उनके पाँव अब दुःख के कब्रिस्तान में नहीं रहते। इसका मतलब है कि उन्होंने अपने गम को पीछे छोड़ दिया है। अब उन्हें धीरे-धीरे, एक नई राह की तरफ़ जाने की लत लग गई है। यह केवल एक जगह से दूसरी जगह जाना नहीं है, यह ज़िंदगी में एक नई उम्मीद का आगाज़ है!

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